शेर-ओ-शायरी

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वह हजार दुश्मने-जाँ सही मुझे फिर भी गैर अजीज है,
जिसे खाके-पा तेरी छू गई, वह बुरा भी हो तो बुरा नही।

-जिगर मुरादाबादी


1.खाके-पा - पांव की धूल

 

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वहाँ सौंपी गयी है खिदमते-अर्जे-वफा मुझको,
जहाँ अहले-वफा की बात ही मानी नहीं जाती।

-'निहाल' सेहरारवी

 

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वहाँ जवाब की जहमत उठा रही है खिरद,
जहाँ सवाल खुद अपना जवाब होता है।

-अब्दुल हमीद अदम


1.जहमत - कष्ट, क्लेश, तकलीफ 2.खिरद - अक्ल, बुद्धि

 

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