शेर-ओ-शायरी

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हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पै दम निकले,
बहुत निकले मेरे अरमाँ लेकिन फिर भी कम निकले।
निकलना खुल्द से आदम का सुनते आये थे लेकिन,
बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले।

-मिर्जा गालिब


1.खुल्द-स्वर्ग,जन्नत 2.बेआबरू- अपमानित, तिरस्कृत

3.कूचा - गली

 

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हमको उनसे वफा की है उम्मीद,
जो नहीं जानते वफा कया है।
जान तुम पर निसार करता हूँ,
मैं नहीं जानता दुआ क्या है।

-मिर्जा गालिब


1.वफा - (i) स्वामी या मित्र के साथ तन,मन,धन से निबाहना और कड़े से कड़े समय पर उसका साथ देना (ii) मुक्ति, वफादारी (iii) निर्वाह, निबाह

 

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हमसे क्या हो सका मुहब्बत में,
तुमने तो खैर बेवफाई की।
-'फिराक' गोरखपुरी

 

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हमीं से सीखकर चालें,
हमीं पै वार करते हैं।

 

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