शेर-ओ-शायरी

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हसरत से उस कूचे को क्यों कर न देखिये,
अपना भी इस चमन में कभी आशियाना था।

-दाग


1.कूचा  - गली

 

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हुए जिस पै मेहरबाँ तुम कोई खुशनसीब होगा,
मेरी हसरतें तो निकलीं मेरे आंसुओं में ढलकर।

-एहसन दानिश

 

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हो वफा जिसमें वह माशूक कहाँ से लाऊँ,
है यह मुश्किल कि हसीं हो, सितमजाद न हो।
-रियाज खैराबादी


1.सितमजाद - सितम ढाने वाला, सितमगर

 

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होता है जिस जगह मेरी बर्बादियों का जिक्र,
तेरा भी नाम लेती है दुनिया कभी-कभी।

 

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