शेर-ओ-शायरी

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आह का किसने असर देखा है,
हम भी अपनी इक हवा बांधते हैं।

-मिर्जा 'गालिब'

 

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आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक,
कौन जीता है तेरी जुल्फ के सर होने तक।

-मिर्जा 'गालिब'


1. सर - सुलझना


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इब्तिदा वो थी कि था जीना मुहब्बत में मुहाल,
इन्तिहा ये है कि अब मरना भी मुश्किल हो गया।

-जिगर मुरादाबादी


1.इन्तिहा - (i) आखिरी हद, छोर (ii) पराकाष्ठा, चरम सीमा

 

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कयामत क्यों नहीं आती इलाही माजरा क्या है,
हमारे सामने पहलू में वो गैरों के बैठे हैं।

-'दाग' देहलवी


1. इलाही - हे खुदा 2. कयामत - महाप्रलय, सारी दुनिया का उलट-पलट


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