शेर-ओ-शायरी

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उनको आरमाँ है हमारी मौत का,
मर मिटे ऐ जिन्दगी जिनके लिये।

-'अख्तर' शीरानी

 

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उन्हें गुस्सा कि उनकी बज्म में मैं किस लिये आया,
मुझे यह गम कि वह पहलू में क्यों दुश्मन के बैठे हैं।

-आशिक

 

1. बज्म - महफिल 2. पहलू - पार्श्व, बगल, अंक, क्रोड, समीपता, नजदीकी

 

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उम्मीदे-वस्ल ने धोके दिये हैं, इस कदर 'हसरत',
कि उस काफिर की हाँ भी नहीं मालूम होती है।

-'हसरत' चिराग हसन

1.उम्मीदे-वस्ल - मिलन की आशा

2.काफिर - सत्य को छिपाने वाला( माशूक)

 

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उम्र भर जलता रहा दिल और खामोशी के साथ,
शम्अ को एक रात की सोजेदिली पर नाज था।


1.सोजेदिली - दिल की जलन या तपिश

 

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