शेर-ओ-शायरी

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उसी को जिसने न की भूलकर भी बात कभी,
बगैर याद किये कट न सकी रात कभी।

-आनन्द नारायण 'मुल्ला'


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उसी महफिल से मैं रोता हुआ आया हूँ ऐ 'आसी',
इशारों से जहाँ लाखों मुकद्दर बदले जाते हैं।

-'आसी' उल्दानी
 

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एक तुम हो कि वफा तुमसे न होगी, न हुई,
एक हम कि तकाजा न किया है, न करेंगे।

-हसरत मोहानी
 

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1.वफा - मित्र के साथ तन,मन और धन से निबाहना, वफादारी, निबाह, निर्वाह 2.तकाजा - माँग, किसी काम के लिए किसी से बराबर कहना
 

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ऐ हासिले-खुलूस बता क्या जवाब दूँ,
दुनिया यह पूछती है कि मैं क्यों उदास हूँ।
-नाजिश प्रतापगढ़

1.हासिले-खुलूस - मुहब्बत का निष्कर्ष या निचोड़

 

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