शेर-ओ-शायरी

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इन्ही में खींचकर रूहे-मुहब्बत मैने भरे हैं,
मेरा अश्यार देखेंगे मेरा दिल देखने वाले।

-जिगर मुरादाबादी


1.अश्यार - शे'र

 

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ईमां गलत, उसूल गलत, इद्देआ गलत,
इन्सां की दिलदेही अगर इन्सां न कर सके।


1.ईमां- धर्म, मजहब 2. इद्देआ- इच्छा, चाह

3.दिलदेही - दिलासा, सांत्वना,ढाढस .
 

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उस आदमी को सौंप दूँ दुनिया का कारोबार,
जिस आदमी के दिल में कोई मुद्दआ न हो।

 

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एक से लगते हैं सब ही कौन अपना, कौन गैर,
बेनकाब आये कोई तो, हम दरे–दिल वा करें।

-खलील


1.दरे–दिल - दिल का दरवाजा 2. वा – खोलना


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