शेर-ओ-शायरी

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एक हमें आवारा कहना, कोई बड़ा इल्जाम नहीं,
दुनिया वाले दिल वालों को और बहुत कुछ कहते हैं।
-हबीब जालिब


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ऐ मौत आ के हमको खामोश तो कर गई तू,
मगर सदियों दिलों के अंदर, हम गूंजते रहेंगे।
-फिराक गोरखपुरी
 

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कम न थी ये आलमे –हस्ती किसी सूरत मगर,
वुसअतें दिल की बढ़ीं इतनी कि
ज़िन्दां हो गयीं।
-जिगर मुरादाबादी


1.आलम - संसार, दुनिया

2. हस्ती - (i) अस्तित्व, दुनिया (ii) जीवन, प्राण, जिन्दगी
3. वुसअत - विशालता, लम्बाई-चौड़ाई (तमन्नाओं की)
4.
ज़िन्दां- कारागार, कैदखाना, कारागृह


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कह रहा था शारे - दरिया से, समन्दर का सकूत,
जिसमें जितना जर्फ है, उतना ही वह खामोश है।
-नातिक लखनवी


1.सकूत - खामोशी, शांति 2. जर्फ - (i) गंभीरता, सहनशीलता

(ii) योग्यता, सलाहियत

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