शेर-ओ-शायरी

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कहते हैं उन्हीं को दुश्मने-दिल, है नाम उन्हीं का नासेह भी,
वे लोग जो रह कर साहिल पर, तूफान की बातें करते हैं।

1.नासेह - नसीहत देने वाला, सदुपदेशक,साहित्यिक परिभाषा में प्रेम-त्याग का उपदेश देने वाला 2. साहिल - किनारा, तट

 

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कहाँ दूर हट के जायें, हम दिल की सरजमीं से,
दोनों जहां की सैरें, हासिल है सब यहीं से।
-जिगर मुरादाबादी


1.सरजमीं - (i) पृथ्वी, जमीन (ii) देश, मुल्क

 

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कहाँ तक बढ़के पहुंचे है, कहाँ तक इल्मोफन साकी
मगर आसूदा इन्साँ का, न तन साकी न मन साकी।

1.इल्मोफन- ज्ञान-विज्ञान और कला या फन
2.साकी - शराब पिलाने वाला या वाली 3.आसूदा - संतुष्ट

 

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किसी चमन में बस इस खौफ से गुजर न हुआ
किसी कली पै न भूले से पाँव धर जाऊं।
-नदीम कासिमी

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