शेर-ओ-शायरी

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क्या लाए हो खुलूसे-मुहब्बत, खुलूसे-दिल
इस जीन्स का तो कोई भी खरीदार नहीं है


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खुलूसे-दिल से पुकारे जो एक बार मुझे,
उस आदमी का है, अभी तक इन्तजार मुझे।


1.खुलूसे-दिल- सच्चा दिल,निष्कपट दिल
 

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खुलूसे-दिल से हो सिज्दे तो उन सिज्दों का क्या कहना,
सरक आया वहीं काबा , जहां हमने जबीं रख दी।

1.खुलूसे-दिल- सच्चा दिल,निष्कपट दिल
2. काबा - मक्के की एक इमारत जिसे मुसलमान ईश्वर का घर मानते हैं
3.जबीं- माथा, भाल

 

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गुलों के साये में अक्सर 'रियाज' तड़पा हूँ,
करार कांटों पै कुछ ऐसा पा लियां मैंने।
-रियाज श्यामनगरी

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