शेर-ओ-शायरी

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छूटकर तेरे आस्ताँ से ऐ दोस्त,
तू ही कह दे, कहाँ रहें हम।

-फिराक गोरखपुरी


1.आस्ताँ - चौखट, दहलीज 

 

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जिन्दगी आप से जिन्दादिली आप से
जब आप सलामत है तो फिर हमको क्या हो।

 

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जिन्दगी कहते हैं किसको, मौत किसका नाम है,
मेहरबानी आप की, नामेहरबानी आपकी।

-प्यारेलाल रशीद

 

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जमाने की अदावत का सबब थी दोस्ती जिनकी,
अब उनको दुश्मनी है हमसे, दुनिया इसको कहते हैं।
-'बेखुद' देहलवी

1.अदावत -
दुश्मनी, शत्रुता

 

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