शेर-ओ-शायरी

<< Previous   दोस्ती  (Friendship) Next >

जो गमे-हबीब से दूर थे, वो खुद अपनी आग में जल गये,
जो गमे-हबीब को पा गये तो गमों से हंस के निकल गये।

-शायर लखनवी

 

1.गमे-हबीब - प्रेमिका या दोस्त का गम

 

*****

 

जो तू गमख्वार हो जाये तो गम क्या,
जमाना क्या, जमाने के सितम क्या।

-त्रिलोकचन्द महरूम


1 गमख्वार - हमदर्द, सहानुभूति करने वाला, दुख-दर्द बांटने वाला

 

*****

 तय होंगे जिन्दगी के कड़े कोस किस तरह,
जब तुम ही इस सफर में
मेरेहमसफर नहीं।

 

*****

 

तुम सलामत रहो हजार बरस,
हर बरस के दिन हों पचास हजार।

-मिर्जा गालिब

 

*****

 

< Previous    page - 1 - 2 - 3 - 4 - 5 - 6 - 7 - 8 - 9 - 10  Next >>