शेर-ओ-शायरी

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तेरी हमदर्द नजरों से मिला ऐसा सुकूं मुझको कि,
मैं ऐसा सुकूं मरकर भी शायद पा नहीं सकता।

-जाँनिसार अख्तर


1.हमदर्द - दुख-दर्द बांटने वाली या वाला

 

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दुश्मन भी हो तो दोस्ती से पेश आये हम,
बेगानगी से अपना नहीं आश्ना मिजाज।

-आतिश


1.बेगानगी - (i) परायापन (ii)अनजानापन 2.आश्ना - परिचित, वाकिफ
 

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दुश्मनी जम कर करो मगर इतना याद रहे,
जब भी फिर दोस्त बन जाये, शर्मिन्दा न हो।

 

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नये  जमाने  में अगर  खुद को उदास  पाऊंगा,
यह शाम याद करके अपने गम को भूल जाऊंगा।

-फिराक गोरखपुरी

 

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