शेर-ओ-शायरी

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यह माना किसी काबिल नहीं हूँ इन निगाहों में,
बुरा क्या है अगर इस दिल की वीरानी मुझे दे दो।
-साहिर लुधियानवी

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यारब! तेरी रहमत से मायूस नहीं फानी,
लेकिन तेरी रहमत की ताखीर का क्या कहिए।
-फानी बदायुनी


1.रहमत - दया, कृपा 2.ताखीर - देर, विलंब

 

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यह चन्द लमहे जो गुजरे तेरी रफाकत में,

  न जाने वह कितने वर्ष काम आयेंगे।
 

1.रफाकत - दोस्ती, मैत्री, मोहब्बत

 

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 यह तमन्ना है किसी दर पै न जाऊँ यारब,

मुझको जो कुछ भी मिले तेरे खजाने से मिले।

 

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