शेर-ओ-शायरी

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यह बज्मे-फलक इससे होगी न सूनी,
अगर टूट जायेंगे दो - चार तारे।

-अफसर मेरठी


1. बज्मे-फलक - आकाश की महफिल यानी तारों की महफिल

 

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यह है बहते हुए दरिया की आवाज,
वहीं जाना है आये थे जहाँ से।

-साकिब लखनवी

 

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समझ तो ली है दुनिया की हकीकत लेकिन,
मगर अब अपना दिल बहला रहा हूँ

 

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