शेर-ओ-शायरी

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तिफ्ल-ए-शीरख्वार को ज्यों-ज्यों शऊर हो चला,
जितना खुदा के पास था, उतना ही दूर हो चला।


1. तिफ्ल-ए-शीरख्वार - दूध मुंहा बच्चा 2.शऊर - (i) विवेक, समझ, अच्छे-बुरे की पहचान (ii) सभ्यता, तमीज (iii) शिष्टता, सलीका

 

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तुझे ऐ ताइरे -शाखे –नशेमन क्या खबर इसकी,
कमी सैयाद को भी बागबाँ कहना ही पड़ता है।

-जगन्नाथ आजाद


1.  ताइरे -शाखे –नशेमन -डाल पर बने घोसले में बैठी पक्षी 2. सैयाद -बहेलिया 3.  बागबाँ- बाग की रखवाली करने वाला, माली

 

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फिक्रे-दुनिया में सर खपाता हूँ,
मैं कहाँ और ये वबाल कहाँ।

-मिर्जा गालिब

1.वबाल - (i) मुसीबत (ii) दुख, कष्ट, तकलीफ (iii) जंजाल, झंझट

 

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बकद्रे-होश हर इक को यहाँ रंज मिलता है,
सुकून से रहते है यहाँ सिर्फ दीवाने।


1. बकद्रे-होश - संवेदनशील
 

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