शेर-ओ-शायरी

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बजा कहे जिसे दुनिया उसे बजा समझो,
जबाने-खल्क को नक्कारा-ए-खुदा समझो।


1.बजा - उचित, मुनासिब 2.जबाने-खल्क - जनता या अवाम की जुबान 3.नक्कारा - दुंदुभी, नगाड़ा, भेरी

 

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बफैजे-मस्लेहत ऐसा भी होता है जमाने में,
कि रहजन को अमीरे-कारवां कहना ही पड़ता है।

- जनगन्नाथ आजाद


1.  बफैजे-मस्लेहत -दुनियादारी के कारण 2.  लूटेरा, डाकू

3. अमीरे-कारवां - कारवां का सरदार
 

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यह दुनिया है, यहाँ हर काम चलता है सलीके से,
यहाँ पत्थर को भी लाले-गरां कहना ही पड़ता है।

-जगन्नाथ आजाद


1.लाले-गरां - कीमती लाल (एक रत्न)

 

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हुदूदे-जात से बाहर निकलकर देख जरा,
न कोई गैर न कोई रकीब लगता है।


1.हुदूद - हदें, सीमाएं 2.जात - (i) कुल, वंश (ii) जाति, बिरादरी, कौम (iii) स्वयं, खुद 3.रकीब - प्रतिद्वंद्वी
 

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