शेर-ओ-शायरी

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आदमियों से भरी है यह सारी दुनिया मगर,
आदमी को आदमी होता नहीं है दस्तयाब ।
-फैज अहमद फैज


1.दस्तयाब - उपलब्ध, प्राप्त

 

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आदमी हैं शुमार से बाहर,
कहत है फिर भी आदमीयत की।

-जोश मलसीयानी


1.शुमार - गिनती, गणना 2. कहत - कमी, अभाव

 

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आप गैरों की बात करते हैं हमने अपने भी आजमाए हैं,
लोग कांटों से बचके चलते हैं, हमने फूलों से जख्म खाए हैं।

-'बेताब' अलीपुरी

 

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आराम के थे साथी क्या - क्या जब वक्त पड़ा तो कोई नहीं,
सब दोस्त हैं अपने मतलब के दुनिया में किसी का कोई नहीं

 

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