शेर-ओ-शायरी

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गनीमत है कफस, फिक्रे-रिहाई क्यों करें हमदम,
नहीं मालूम अब कैसी हवा चलती हो गुलशन में।

-साकिब लखनवी


1.कफस - पिंजड़ा, कारागार 2.फिक्रे-रिहाई - रिहाई की चिन्ता

 3.हमदम - दोस्त, मित्र, हर समय का साथी

 

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गले पर छुरी ही क्यों नहीं फेर देते,
असीरों को बेबालोपर करने वाले।

-यगाना चंगेजी


1.असीरों
को - पिंजड़े में कैद परिन्दों को 2. बेबालोपर - (i) जिसके पास जीविका का कोई साधन न हो, जीविका-विहीन (ii) बेबस, निस्सहाय

 

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गैरों को क्या पड़ी है रूसवा मुझे करें,
इन साजिशों में हाथ किसी आशना का है।


1. आशना- अपना, परिचित
 

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जड़ मेरी आज उसी शख्स ने काट दी,
थक के बैठा था कल जो मेरी छांव में।

 

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