शेर-ओ-शायरी

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जहाँ इन्सानियत वहशत के आगे जिबह होती है,
वहां जिल्लत है दम लेना वहां बेहतर है मर जाना।

-गुलजार देहलवी


1.वहशत - (i) भय, डर (ii) पागलपन

 

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जिन खताओं पर दरे-जन्नत हुआ आदम पै बंद,
वो खतायें ही बिना- ए - बज्मे - इम्काँ हो गईं।

-निहाल सेहारवी

1.खता - (i) दोष, अपराध (ii) त्रुटि, भूल (iii) कुसूर, अपराध

 2.दरे-जन्नत - स्वर्ग का दरवाजा
3.बिना-ए-बज्मे-इम्काँ - महफिल के अस्तित्व का आधार या बुनियाद

 

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जीती-जागती दुनिया में भी,
चलते - फिरते मुर्दे देखे।

-फिराक गोरखपुरी

 

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डूबने वाले की मइयत पै लाखों रोने वाले हैं,
फूट-फूट के जो रो रहे हैं,वे ही डुबोने वाले हैं।


1. मइयत - अर्थी

 

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