शेर-ओ-शायरी

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और भी दिलकश है तेरा हुस्न मगर क्या कीजे
और भी गम है जमाने में मुहब्बत के सिवाय,
राहतें और भी है वस्ल की राहत के सिवाय
मुझसे पहली - सी मुहब्बत मेरे महबूब न माँग।

-फैज अहमद फैज

 

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इलाही उनके हिस्से का भी गम मुझको अता कर दे,
कि उन मासूम आंखों में नमी देखी नहीं जाती।


1.इलाही - खुदा 2. अता - प्रदान

 

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ईमां गलत, उसूल गलत, इद्देआ गलत,
इन्सां की दिलदेही अगर इन्सां न कर सके।


1.ईमां - धर्म, मजहब 2.इद्देआ - इच्छा, चाह 3. दिलदेही - दिलासा, सांत्वना, ढाढस

 

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कसरते-गम में लुत्फे-गमख्वारी,

सागरे -जाम का काम देती है,
वक्त पर एक लफ्जे - हमदर्दी,

इब्ने - मरियम का काम देता है।
-अब्दुल हमीद अदम


1.कसरते-गम - गम की अधिकता 2. लुत्फ - दया, रहम, अनुकंपा, मेहरबानी 3. गमख्वारी – हमदर्दी 4. सागर - शराब का पियाला 5. इब्ने – मरियम - मरियम के पुत्र हज्रत ईसा मसीह, जो दीन-दुखियों के पिता कहलाते हैं।

 

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