शेर-ओ-शायरी

  गुलिस्तां  (Garden)  Next >>

इस नये दौर में देखे है वो रहजन मैंने,
जो बहारों को गुलिस्तां से चुरा ले जाए।
दे निगाहों को जो धोखा तो पता भी न चले,
चाँदनी अंजुमे - ताबाँ से उठा ले जाए ।
इलाही आबरू रखना बड़ा नाजुक जमाना है,
दिलों में बुग्ज रहता है बजाहिर दोस्ताना है।

1.रहजन - लूटेरे, डाकू, रास्ते में लूट लेने वाले 2.अंजुमे–ताबाँ-आकाश के प्रकाशमान तारे 3. इलाही - हे खुदा 4. बुग्ज - रंजिश, वैमनस्
 

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क्या जरूरत क्यों जफाएँ बागबाँ तेरी सहें,
जां तुझे गुलशन मुबारक, हमको वीराने बहुत।

-'राही' शिहाबी


1. जफा - जुल्म, अत्याचार, जोरजबरदस्ती

2. बागबाँ - माली, उद्यानपाल

 

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जमाना जो आतिशफिशाँ है तो क्या गम,
हम आतिशकदे को गुलिस्ताँ करेंगे।

-'शकील' बदायुनी


1. आतिशफिशाँ - आग बरसाने वाला 2. आतिश
कदा -

अग्निशाला, वह स्थान जहाँ चुल्हा या भट्ठी जलती हो।

 

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न जाने रात क्या गुजरी चमन में,
सहर के वक्त थे गुल आबदीदा।

नजर सेहरारवी


1. सहर - सुबह

2. आबदीदा - जिसकी आंखों में आंसू भरे हों, सजलनयन, रूआंसा
 

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