शेर-ओ-शायरी

   हक़ीक़त  (Reality)  Next >>

आने लगा हयात को अंजाम का खयाल,
जब आरजूएं फैलकर इक दाम बन गईं।

-बाकी सिद्दकी

 

1.हयात - जिन्दगी, जीवन 2. दाम - जाल, पाश, फंद

 

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इस जमीं पै जिन्का था दबदबा कि बुलंद अर्श पै नाम था,
उन्हें यूँ फलक ने मिटा दिया कि मजार तक का निशां नहीं।

-चकबस्त लखनव


1. दबदबा -
(i) रोबदाब, प्रताप, तेज, प्रभाव (ii) आतंक 2. बुलंद - ऊँचा 3. अर्श - आकाश, फलक, आसमान 4. फलक - आकाश, गगन, अंबर, ब्योम
 

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उजाले जश्ने-बहाराँ के खूब हैं लेकिन,
अंधेरे बीते हुए शब के याद आते हैं।

-कृष्ण बिहारी 'नूर'


1. जश्ने-बहाराँ - बहारों (यानी खुशियों) के जश्न

2. शब - रात, रजनी, यामिनी, रात्रि

 

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एक हंगामे पै मौकूफ है घर की रौनक,
नौहा-ए-गम ही सही, नग्मा-ए-शादी न सही।

-मिर्जा 'गालिब'


1. हंगामा - (i) कोलाहल, शोरगुल (ii) कांति, उथल-पुथल, विप्लव

2. मौकूफ - निर्भर, आधारित, मुनहसिर 3. नौहा-ए-गम - किसी की मृत्यु पर रोना-पीटना 4. नग्मा-ए-शादी - शादी का गीत या गान

 

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