शेर-ओ-शायरी

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खा-खा के शिकस्त फतह पाना सीखो
गिरदाब में कहकहा लगाना सीखो,
इसे दौरे –तलातुम में अगर जीना है
खुद अपने को तूफान बनाना सीखो।

-नजीर बनारसी

1. शिकस्त - पराजय, पराभव, हार 2. फतह - विजय, जीत, कामयाबी, सफलता 3. गिरदाब - भंवर, जलावर्त 4. दौरे–तलातुम - तूफानी दौर, पानी का मौजें मारना,बाढ़, तुग्यानी

 

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खाते रहे फरेब, संभलते रहे कदम,
चलते रहे जुनूं का सहारा लिये हुए।
-'शारक' मेरठी


1. जुनूं - उन्माद, पागलपन

 

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खिरदमंदों से क्या पुछूँ कि मेरी इब्तिदा क्या है
कि मैं इस फिक्र में रहता हूँ मेरी इन्तिहा क्या है,
खुदी को कर बुलन्द इतना कि हर तकदीर से पहले
खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है?

-मोहम्मद इकबाल

1.खिरदमंदों - बुद्धिमानों, अक्लमंदों 2. इब्तिदा - प्रारम्भ, आरम्भ, शुरूआत

3. इन्तिहा - अंत, आखिरी हद या छोर 4. रजा - इच्छा, तमन्ना, ख्वाहिश

 

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खुद यकीं होता नहीं जिनको अपनी मंजिल का,
उनको राह के पत्थर कभी रास्ता नहीं देते।

 

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