शेर-ओ-शायरी

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गमे - हस्ती के बियाबानों से,
कुछ हमीं थे जो गजलख्वाँ निकले।

-मिर्जा गालिब


1. बियाबान - जंगल, वन 2. गजलख्वाँ - गजल गाते हुए

 

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गुलों के साये में अक्सर 'रियाज' तड़पा हूँ,
करार कांटों पै कुछ ऐसा पा लिया मैंने।

-'रियाज' खैराबादी
 

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चला जाता हूँ हँसता-खेलता मौजे-हवादिस से,
अगर आसानियाँ हों जिन्दगी दुश्वार हो जाये।

-असगर गौण्डवी


1.मौजे-हवादिस – दुर्घटनाओं या हादसों की लहरें या तरंगें

 

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चलो एक मुश्किल तो आसाँ हुई,
सुना है रास्ता बहुत पुरखतर है।

-अब्दुल हमीद 'अदम'


1.पुरखतर - खतरनाक, भयानक, भीषण मुसीबतों और खतरों से भरा हुआ
 

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