शेर-ओ-शायरी

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जब इश्क हो अपनी धुन में रवाँ

बे-खौफ-ओ- खतर मंजिल की तरफ,
वह राह की मुश्किल क्या जाने,

वह दूरिए-मंजिल क्या जाने।
-जगन्नाथ 'आजाद'
 

1. रवाँ - प्रवाहित, बहता हुआ

2. बे-खौफ-ओ-खतर – बिना डर या निडर होकर
 

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जब कश्ती साबितो-सालिम थी,

साहिल की तमन्ना किसको थी,
अब ऐसी शिकस्ता कश्ती पर,

साहिल की तमन्ना कौन करे।
-मुइन अहसन 'जज्बी'


1.साबितो-सालिम - ठीकठाक 2. साहिल - किनारा, तट

3. शिकस्ता - टूटी हुई
 

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जब  वलवला सादिक होता है

जब अज्म मुसम्मम होता है,
तकमील का सामाँ गैब से खुद

उस वक्त  फराहम होता है।

1.वलवला - साहस, उत्साह, हिम्मत, उमंग, जोश 2. सादिक - सच्चा, सही
3. अज्म - संकल्प, विश्वास, इरादा 4. मुसम्मम - दृढ़, मजबूत, पक्का
5. तकमील - काम का पूरा या समाप्त होना यानी कामयाबी, सफलता
6. गैब - परोक्ष, परलोक 7. फराहम - इकट्ठा, एक जगह

 

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जमाने से जो डरते हैं, जलीलो –खार होते हैं
बदल देते हैं जो माहौल वो खुद्दार होते हैं,
हजारों डूबते हैं नाखुदाओं के भरोसे पर
चलाते हैंजो खुद चप्पू वो अक्सर पार होते हैं।


1. जलीलो -खार - बर्बाद 2. नाखुदा - मल्लाह, नाविक, कर्णधार
 

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