शेर-ओ-शायरी

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जरा थमे जो यह तूफां तो हो कुछ अन्दाजा,
कहाँ हूँ मैं, कहाँ कश्ती, कहाँ किनारा है।

 

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जरा दरिया की तह तक तू पहुंच जाने की हिम्मत कर,
तो फिर ऐ डूबने वाले, किनारा ही किनारा है।

-माहिर-उल-कादिरी

 

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जल भी जाये निशेमन तो परवा नहीं,
बिजलियों से मेरा दोस्ताना तो है।


1. निशेमन - घोसला, नीड़, आशियाना
 

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जहाँ खुद खिज्रे-मंजिल, राहे-मंजिल भूल जाता है,
हमें आता है उन पुरपेच राहों से गुजर जाना।

-अब्र एहसनी


1. खिज्रे-मंजिल - मंजिल का रास्ता दिखाने वाला, मार्गदर्शक, पथप्रदर्शक, रहनुमा 2. पुरपेच - टेढ़ा-मेढ़ा, जटिल पे

 

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