शेर-ओ-शायरी

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अभी तो बहुत दूर है तुमको जाना,
है पुरपेच राहों से होकर गुजरना।
संभलकर है गिरना, है गिरकर संभलना,
कहाँ तक चलोगे किसी के सहारे।

-अफसर मेरठी

 

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अभी मरना बहुत दुश्वार है गम की कशाकश से,
अदा हो जायेगा यह फर्ज भी फुर्सत अगर होगी।

-नजर लखनवी


1. कशाकश - (i) खींचतान, खीचा-खींची, संघर्ष (ii) चढ़ा-ऊîपरी, स्पर्धा (iii) असमंजस


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अहले-हिम्मत ने हुसूले-मुद्दआ में जान दी,
और हम बैठे हुए रोया किये तकदीर को।

-असर लखनवी


1.अहले-हिम्मत - साहसी, हिम्मती 2. हुसूले-मुद्दआ - उद्देश्य की प्राप्ति

 

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आशियाँ फूंका है बिजली ने जहाँ सौ मर्तबा,
फिर उन्हीं शाखों पै, तरहे-आशियाँ रखता हूँ मैं।

-निहाल सेहरारवी


1. तरहे-आशियाँ - घोसले की नींव या बुनियाद

 

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