शेर-ओ-शायरी

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न खौफे-तूफां, न शौके-साहिल, खुशामदे-नाखुदा करें क्यों?
जो इन थपेड़ों को सह गये हम, नई जिन्दगी मिलेगी।

-'महवी' लखनवी


1.शौके-साहिल - किनारे की ख्वाहिश 2. नाखुदा - मल्लाह, नाविक

 

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नाम से जिसके लरज उठते हैं साहिल वाले,
परवरिश पाई है हमने उन्हीं तूफानों में।

-'निहाल' रिज्वी
 

1.साहिल - किनारा
 

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निगाहे-शौक को शाखे-निहाले-गुल की तलाश,
हवाए-तुन्द की यह जिद कि आशियाँ न बने।


1.निगाहे-शौक - अभिलाशा, उत्कंठा या ख्वाहिश की निगाह (यानी तलाश)
2. शाखे-निहाले-गुल - फलों से सजी हुई डाली

3. हवाए-तुन्द - तेज या प्रचंड हवा
 

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निशेमन पर निशेमन इस कदर तामीर करता जा,
कि बिजली गिरते-गिरते आप खुद बेजार जो जाये।


1. तामीर - निमार्ण, बनाना 2. बेजार - परेशान


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