शेर-ओ-शायरी

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पड़े हैं जो मुन्तशिर तिनके, उठा-उठा के सजा रहा हूँ,
खबर करे कोई बिजलियों को कि फिर निशेमन बना रहा हूँ।

-'नैयर' अकबराबादी
 

1. मुन्तशिर - बिखरे हुए 2. निशेमन - आशियाना, घोसला, नीड़

 

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पढ़े जो गौर से तारीख के वरक हमने,
आंधिओं में भी जलते हुए चराग मिले।


1. तारीख - इतिहास 2. वरक - पन्ने

 

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पर्वर्द-ए-तूफां को कश्ती की नहीं हाजत,
मौजों के तलातुम में उनको, साहिल नजर आता है।

-जिगर मुरादाबादी


1.पर्वर्द-ए-तूफां - तूफान में पले हुए 2. हाजत - जरूरत, आवश्यकता

इच्छा, ख्वाहिश 3. मौज - लहर 4. तलातुम - हलचल

 5. साहिल - किनारा,   तट


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पाँओं में दम रहे तो दयार बहुत,
हाथ चलते हों रोजगार बहुत।


1. दयार - स्थान, जगह

 

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