शेर-ओ-शायरी

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फलक को जिद है जहाँ बिजलियाँ गिराने की,
हमें भी जिद है वहीं आशियाँ बनाने की।


1. फलक - आकाश, आसमान, अर्श 2. आशियाँ - घोसला, आशियाना, नीड़

 

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फिजाएं रास न आयेंगी उसको साहिल की,
जिसने गोद में तूफाँ की परिवरिश पाई है।

-'नज्म' मुजफ्फरनगरी


1. साहिल - किनारा

 

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फिर तूफानों पर भी काबू पालेंगे,
पहले टकराना सीखो तूफानों से।

-खलिश
 

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बना लूँगा ऐसे हजार आशियाँ मैं,
अगर शोलाजन आशियाँ है तो क्या गम।

-'निहाल' सेहरारवी


1.शोलाजन - जलता हुआ, जिसमें आग लग गई हो, लपटों पर

 

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