शेर-ओ-शायरी

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मुश्किलों ने खुद फराहम की है आसानी मुझे,
पत्थरों ने भी दिया है वक्त पर पानी मुझे।


1. फराहम - एकत्र, इकट्ठा, एक जगह
 

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मेरी नजरों में खाक आशियाँ भी आशियाँ होंगे,
जिन्हें हैं बिजलियों का खौफ फिक्रे-आशियां कर लें।


1. खाक - बर्बाद
 

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मैं अकेले ही चला था जानिबे-मंजिल मगर,
लोग साथ आते गए, और कारवां बनता गया।


1. जानिबे-मंजिल - मंजिल की ओर
 

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मैंने खुद अपना सफीना नज्रे-तूफां कर दिया,
यास की नजरों से तकता ही रहा साहिल मुझे।

-अनवर मिर्जापुरी
 

1. सफीना - नाव, नौका, कश्ती 2. नज्रे-तूफां - तूफान की भेंट
3. यास - निराशा 4. साहिल - किनारा, तट

 

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