शेर-ओ-शायरी

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रहा बर्के-तपां से साबिका तकदीर में इतना,
कि अब अपना निशेमन हम बनाते हैं शरारों में।

-आसी उल्दानी


1. बर्के-तपां - कौंधती बिजली 2. साबिका - वास्ता, संबंध
3. निशेमन - घोसला, नीड़, कुलाय 4. शरारा - अग्निकण, चिंगारी

 

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रास्ता रोकने वालों तुम्हें मालूम नहीं,
तुमने पैगाम दिया है मुझे चलने के लिए।


1. पैगाम - संदेश, पयाम, संदे

 

रूकती नहीं किसी के लिये मौजे-जिन्दगी,
धारे से जो हटे, वो किनारे पर आ गये।

-आनन्द नारायण मुल्ला
 

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लाख खुर्शीद सरे-बाम अगर हैं तो रहें,
हम कोई मोम नहीं हैं कि पिघल जायेंगे।

-शहरयार


1. खुर्शीद - सूर्य, सूरज 2.सरे-बाम - सर के ऊपर

 

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