शेर-ओ-शायरी

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आहन नहीं कि चाहे जिधर मोड़ दीजिए,
शीशा हूँ मुड़ तो सकता नही, तोड़ दीजिए।
पत्थर तो रोज आते ही रहते हैं सहन में
हल इसका यह नहीं है कि घर छोड़ दीजिए।


1. आहन - लोहा, लौह 2. सहन - आंगन, अँगनाई

 

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इन्सान मुसीबत में हिम्मत न अगर हारे,
आसाँ से वह आसां है, मुश्किल से जो मुश्किल है।

-'सफी' लखनवी


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इब्तिदा में हर मुसीबत पर लरज जाता था दिल,
अब कोई गम इम्तिहाने-इश्क के काबिल नहीं।


1. इब्तिदा - शुरू, आरम्भ

 

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इरादे-कोहशिकन फौलाद जैसे दस्तोबाजू है,
मैं लंगर उठाने वाला हूँ तूफां को बता देना।


1.इरादे-कोहशिकन - पर्वत को तोड़ने वाला

इरादा या संकल्प


 

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