शेर-ओ-शायरी

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ले चल हाँ मझधार  में ले चल, साहिल साहिल क्या जानूं,
मेरी कुछ परवाह न कर, मैं खूगर हूँ तूफानों का।

-हफीज जालंधरी


1. मझ
धार - नदी के बीचोबीच 2. साहिल – किनारा, तट

3. खूगर - आदी
 

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वह मर्द नहीं जो डर जाये, माहौल के खूनी खंजर से,
उस हाल में जीना लाजिम है जिस हाल में जीना मुश्किल है।

-'अर्श' मल्सियानी


1. खंजर - तलवार

 

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वह मेरी जौलाँगाह नहीं वह मेरा फर्शे-ख्वाब नहीं,
जिस दरिया में तूफान नहीं, जिन मौजों में गिर्दाब नहीं।

-सागर


1.जौलाँगाह - दौड़ने का मैदान, सैर का स्थान

2. फर्शे-ख्वाब - सोने का बिछौना 3. गिर्दाब - भंवर, जलावर्त
 

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वह अज्म रखता हूँ जो हादसों में पलता है,
हवा-ए-तुन्द में मेरा चराग जलता है।


1. अज्म - संकल्प, दृढ़ निश्चय, पक्का इरादा

2. हवा-ए-तुन्द - तेज या प्रचण्ड हवा

 

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