शेर-ओ-शायरी

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वही है साहिबे-इमरोज जिसने अपनी हिम्मत से,
जमाने के समन्दर से निकाले गौहरे-फर्दा।


1. साहिबे-इमरोज - अपने समय का मालिक 2. गौहर - मोती, मुक्ता, मुक्तक, मणि 3. फर्दा - आनेवाला कल
 

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शाखों से टूट जायें वह पत्ते नहीं हैं हम,
आंधी से कोई कह दे औकात में रहे।

-'राहत' इन्दौरी

 

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संवारना है अगर तुमको गुलशने-हस्ती
तो पहले कांटों में उलझाओ जिन्दगानी को।

 

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सफर में सईए-कामिल हो तो निकले राह मंजिल की,
कि दरिया की रवानी से, बिना पड़ती है साहिल की।

-नातिक लखनवी


1.सईए-कामिल - मुकम्मल प्रयास, पूरी कोशिश, पराक्रम 2. रवानी - प्रवाह, बहाव, धार 3. बिना- नींव,आधार, बुनियाद 4.साहिल - किनारा, तट


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