शेर-ओ-शायरी

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हर मील के पत्थर पर लिख दो यह इबारत,
मंजिल नहीं मिलती, नाकाम इरादों से।


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हर मुसीबत का दिया इक तबस्सुम से जवाब
इस तरह गर्दिशे-दौरां को रूलाया मैंने।


1.तबस्सुम - मुस्कान

2. गर्दिशे-दौरां - जमाने की मुसीबतें, समय का चक्र, समय का उलट-फेर


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हर रहगुजर पै शम्अ जलाना है मेरा काम,
तेवर हैं क्या हवा के, यह मैं देखता नहीं।


1.रहगुजर - रास्ता, पथ, मार्ग
 

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हुआ करती हैं दुश्वारी ही से आसानियाँ पैदा,
बड़े नादान हैं मुश्किल को जो मुश्किल समझते हैं।

-'अलम' मुजफ्फरनगरी

 

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