शेर-ओ-शायरी

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हुजूमे - तबाही से मैं खेलता हूँ,
तबाही का हर –सू निशां है तो क्या है?
बना लूँगा ऐसे हजार आशियाँ मैं,
अगर शोलाजन आशियाँ है तो क्या गम।

-निहाल सेहरारवी


1.हुजूमे – तबाही – तबाहियों का हुजूम 2. हर –सू - चारों ओर

3. शोलाजन - जलता हुआ, आग की लपटों पर
 

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है किसको यह मयस्सर यह काम कर गुजरना,
इक बांकपन से जीना, इक बांकपन से मरना।

-जिगर मुरादाबादी

 

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हौसलों की बात आई है तो सुन लीजिए,
सिर्फ मेरे नाम से बदले हैं तूफानों के रूख।

 

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