शेर-ओ-शायरी

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एक पत्थर की तकदीर भी संवर सकती है,
शर्त यह है कि उसे सलीके से संवारा जाए।

 

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एक मौज मचल जाए तो तूफां बन जाये,
एक फूल अगर चाहे तो गुलिस्तां बन जाये।
एक खून के कतरे में है तासीर इतनी
एक कौम की तारीख का उन्वान बन जाये।

-अब्दुल हमीद 'अदम'


1. तासीर - असर, प्रभाव 2. तारीख - इतिहास 3. उन्वान - विषय


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ऐ ताइरे-लाहूती, उस रिज्क से मौत अच्छी,
जिस रिज्क से आती हो,परवाज में कोताही।

-मोहम्मद इकबाल


1. ताइरे-लाहूती – आकाश में उड़ने वाला पंक्षी या
परिंदा
2. रिज्क - जीविका, रोजी, अन्न 3. परवाज - उड़ान

 4. कोताही - (i) कमी ii) त्रुटि, खामी (iii) भूल

 

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ऐ देखने वाले साहिल से, मौजों से लिपट, तूफां से उलझ,
नज्जारा-ए-तूफां करने से, अन्दाजए-तूफां क्या होगा।


1. साहिल - किनारा, तट
 

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