शेर-ओ-शायरी

हुस्न-ए-निगाह  (Beauty lies in beholder's eye)      

हर शै हसीन होती है हुस्ने-निगाह से,
कुछ भी न हो हसीन अगर हुस्ने-नजर न हो।

 

*****

 

निगाहे-कहर को गुलशन नजर आता है वीराना,
निगाहे-मेहर वीराने में गुलशन ढूँढ़ लेती है।


1.निगाहे-कहर - कोपदृष्टि 2.निगाहे-मेहर - कृपादृष्टि

*****