शेर-ओ-शायरी

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क्या हुस्न ने समझा है, क्या हुस्न ने जाना है,
हम खाकनशीनों के ठोकर में जमाना है।
-जिगर मुरादाबादी

1.खाकनशीन - (i) विनम्र या विनीत लोग (ii) दुखी या लाचार लोग

 

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क्यों आज बेपिये ही बहकने लगा हूँ मैं,
अपनी नजर के मस्त इशारों से पूछ लो।
-आलम बस्तवी

 

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क्यों जल गया न ताब-ए-रूख-ए-यार देखकर,
जलता हूँ अपनी ताकत-ए-दीदार देखकर।
-मिर्जा गालिब

1.ताब-ए-रूख-ए-यार - माशूक या प्रेयसी के चेहरे की आभा या चमक

 

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क्यों सादगी के तौर अब कुछ बाँकपन के है,
अब तक तो बाँकपन में अदा सादगी की थी।

-'फानी' बदायुनी

1. तौर - शैली, पद्धति, ढंग

 

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