शेर-ओ-शायरी

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खुदा जाने करेगा चाक किस-किस के गिरेबां को,
अदा से उनका चलने में, वह दामन को उठा लेना।

 

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खुला यह राज जब आये वो बाल बिखराये,
कि रौशनी से जियादा हसीन हैं साये।

-अरशद काकवी
 

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खुश्बू वही, वही है नजाकत, वही है रंग,
माशूक क्या है फूल है तू भी गुलाब का।

-मिर्जा दाग

 

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खूब पर्दा है कि चिलमन से लगे बैठे हैं,
साफ छुपते भी नहीं सामने आते भी नहीं।


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