शेर-ओ-शायरी

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खूब इन्साफ तेरे अंजुमने-नाज में है,
शम्अ का रंग जमे, खून हो परवाने का।
-'जलील' मानिकपुरी


1.अंजुमने - महफिल

 

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गमजे भी हों खूरेज, निगाहें भी हो सफ्फाक,
तलवार के बांधे से तो कोई कातिल नहीं होता।

-मिर्जा दाग


1.गमजा - आँख का इशारा 2.खूरेज - खून बहाने वाले, निर्दय, बेरहम 3.सफ्फाक - रक्तपाती, खून बहाने वाला, निष्ठुर, संगदिल, अत्याचारी,

 

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'गालिब' तेरा अहवाल सुना देंगे हम उनको,
वह सुन के बुला लें, यह इजारा नहीं करता।
-मिर्जा 'गालिब'


1. इजारा - ठेका, वादा

 

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गिने जा रहे है मेरे जख्मे-जिगर,
कोई तीर शायद खता हो गया है।

-'जिगर' मुरादाबादी
 

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