शेर-ओ-शायरी

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गिरा देंगे नजरों से अपनी वह मुझको,
निगाहों में उनकी समाकर करूँ क्या?

-बहजात लखनवी

 

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गुल से भी नाजुक बदन उसका है लेकिन दोस्तों,
यह गजब क्या है कि दिल पहलू में पत्थर का बना है।
-बहादुशाह 'जफर'


1. पहलू - पार्श्व, बगल

 

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गुलशन के दिलफरेब नजारों से पूछ लो,
मेरा न हो यकीं तो बहारों से पूछ लो।
हर शै में रौशनी है तुम्हारे जमाल की,
मेरा न हो यकीं तो सितारों से पूछ लो।
-आलम बस्तवी


1.शै - चीज

2.जमाल - (i) सौन्दर्य, खूबसूरती, हुस्न (ii) मुख्कान्ति ,मुखाभा

 

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गुलों की गोद में जैसे नसीम आकर मचल जाए,
उसी अंदाज से उन पुरखुमार आंखों में ख्वाब आया।

-'असर' लखनवी


1. नसीम - ठंडी और धीमी हवा 2.पुरखुमार - नशे में चूर, मस्त
 

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