शेर-ओ-शायरी

<< Previous  हुस्न  (Beauty)   Next>>

जज्ब कर ले जो तजल्ली को वह हुनर पैदा कर,
सहल है सीने को दागों से चरागाँ करना।

-असर लखनवी


1.तजल्ली - नूर, रौशनी, आभा (चेहरे या मुखड़े की)

2. चरागाँ - जलते हुए चरागों की कतारें, रौशन
 

*****


जफा उस पै करता है सबसे जियादा,
जिसे यार अहले-वफा जानता है।

-मीरतकी 'मीर'


1.जफा – सितम, अत्याचार 2.अहले-वफा - वफा निभाने वाला,वफादार

 

*****

जब बहारों ने पाया कोई भी अपना मुकाम,
तेरे होठों के तबस्सुम से लिपट कर सो गईं
-नरेश कुमार 'शाद'


1.तबस्सुम - मुस्कान, कुस्कुराहट, स्मित, मंदहास

 

*****


जब मिली आंख होश खो बैठे,
कितने हाजिरजवाब हैं हम लोग।
-'असर' लखनवी

 

*****

 

<< Previous  page -1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23-24-25-26-27-28-29-30-31-32-33-34-35-36-37-38-39-40-41-42-43-44-45-46-47-48-49-50-51-52-53-54-55-56-57-58-59-60-61-62-63-64-65-66-67-68-69-70-71-72-73-74         Next >>