शेर-ओ-शायरी

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जिक्र छिड़ गया जब कयामत का,
बात पहूंची तेरी जवानी तक।
-'फानी' बदायुनी

 

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जिस तरह इक नसीम को झोंका डाल देता है झील में हलचल,
यूँ तेरी निगाह ने इस वक्त कर दिया है मेरी रूह को बेकल।

-'अख्तर' अंसारी


1.नसीम - धीमी हवा
 

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जिस तरह से आप मुस्कुराए हैं
ऐसे कोई कली नहीं खिलती।

-मुनव्वर लखनवी

 

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जिस तरह से सुबह को होता है बेरौनक चराग,
देख तुमको उड़ गया, गुलशन में गुल का रंगोबू।
-दर्द
 

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