शेर-ओ-शायरी

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तिरछी नजर का तीर है मुश्किल से निकलेगा,
दिल उसके साथ निकलेगा, अगर ये दिल से निकलेगा।
-'फानी' बदायुनी
 

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तुम उनके वादे का जिक्र उनसे क्यों करो 'गालिब',
ये क्या कि तुम कहो और वो कहें कि याद नहीं।

-मिर्जा 'गालिब'
 

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तुम मुखातिब भी हो, सामने भी हो,
तुमको देखूँ कि तुमसे बात करूँ।

-'फिराक' गोरखपुरी


1.मुखातिब - सम्बोधन कर्त्ता, बोलने वाला, बात करने वाला

 

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तुमने आकर मिजाज पूछ लिया,
अब कहाँ तबिअत संभलती है।
-'जलील' मानिकपुरी
 

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