शेर-ओ-शायरी

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तुमने देखी है वो पेशानी वो रूखसार, वो होंठ,
जिन्दगी जिनके तसव्वर में लुंटा दी मैंने।
-फैज अहमद 'फैज'


1.पेशानी - ललाट, भाल, माथा 2.रूखसार - गाल, कपोल, आरिज 3.तसव्वर - कल्पना, ध्यान, विचार, खयाल, तखैयुल

 

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तुम्हारा हुस्न आराइश, तुम्हारी सादगी जेवर,
तुम्हें कोई जरूरत ही नहीं बनने-संवरने की।

-'असर' लखनवी


1. आराइश - सिंगार, सजावट, आभूषण

 

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तुम्हारी बेरूखी ने लाज रख ली बादाखाने की,
तुम आंखों से पिला देते तो पैमाने कहाँ जाते।

-'कतील' शिफाई


1. बादाख
ना - शराबखाना, मदिरालय
 

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तुम्हारी बज्म में हम खुद संभल जाते यह मुश्किल था,
तुम्ही बेताब करते थे, तुम्हीं फिर थाम लेते थे।
-'जलाल' लखनवी


1.बज्म - महफिल 2.बेताब - (i) व्याकुल, बेचैन, बेकरार (ii) अधीर, बेसब्र (iii) मुश्ताक, उत्कंठित

 

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