शेर-ओ-शायरी

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 तेरे कूचे में सब मुश्ताक, इक जलवे को बैठे हैं,
नजर वाले, जिगर वाले, कलम वाले, जबाँ वाले।

-आनन्द नारायण 'मुल्ला'


1.कूचा - गली 2.मुश्ताक - लालायित, ख्वाहिशमंद

 

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तेरे जमाल को आराइशों से क्या मतलब,
भला बहारे-मुजस्सिम में क्या बहार आये।
उस एक शब के सहारे गुजर रही है हयात
वह एक शब जो तेरी महफिल में गुजार आये।

1.आराइश- जेवर, आभूषण, सिंगार, सजावट 2.बहारे-मुजस्सिम -

 जो साक्षात् बहार हो

3.शब - रात, निशा, रजनी, यामिनी, रात्रि

 

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तेरे जलवों की जौबारी की कितनी मुद्दतें गुजरीं,
मगर अब भी नजर में रौशनी मालूम होती है।
-'अलीम' मंगरौली
 

1. जौबारी - रौशनी फैलाना, जगमगा देना

 

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