शेर-ओ-शायरी

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तेरे सवाल पै चुप हैं इसे गनीमत जान,
कहीं जवाब न दे दें कि मैं नहीं सुनता।

-मिर्जा 'गालिब'

 

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दावर के समने बुते-काफिर को क्या  कहें,
दोनों की शक्ल एक है किसको खुदा कहूँ
मारो भी तुम, जिलाओ भी तुमको क्या कहूँ,
तुमको खुदा कहूँ या खुदा को खुदा कहूँ।
-रियाज खैराबादी


1. दावर – ईश्वर 2.बुते-काफिर - बेवफा सनम या प्रेमिका

 

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दिखा के मदभरी आंखें कहा ये साकी ने,
हराम कहते हैं जिसको यह वो शराब नहीं।

-'खुमार' बाराबंकवी


1.साकी - शराब पिलाने वाली

 

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